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डॉ. नौहेरा शेख को गिरफ्तार करके विभाग क्या हासिल करना चाहता है?

निवेशकों के पैसे के भुगतान में देरी करना ही उद्देश्य लगता है


नई दिल्ली (रिलीज: मतीउर रहमान अजीज की रिपोर्ट) सीसीएस हैदराबाद द्वारा डॉ. नौहेरा शेख की गिरफ्तारी से दर्जनों सवाल उठ रहे हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण चिंताएं इस रिपोर्ट में जताई गई हैं। पहला सवाल यह है कि हीरा ग्रुप के सीईओ को गिरफ्तार करके विभाग ऐसा कौन सा चमत्कार करना चाहता है जो डॉ. नौहेरा शेख को बरामद करके नहीं हो पाया। दूसरा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश से एक महीने पहले गैर-जमानती वारंट जारी करना और उसे गिरफ्तार करने के लिए एक शहर से दूसरे शहर तक जाने की मशक्कत करना और एक ऐसी एफआईआर पर कार्रवाई करना जिसके लिए पहले ही पैसे दिए जा चुके थे और उस एफआईआर पर जमानत भी मिल चुकी थी और फिर भी कार्रवाई करके उसे सलाखों के पीछे भेजना, यह दर्शाता है कि कुछ खास कारकों की छाया में काम करने का संकेत है। तीसरा सवाल यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के निवेशकों को पैसा देने के लिए ईडी के तत्वावधान में पांच जमीनें दी गईं और कार्यवाही जारी रही, इसके बावजूद गिरफ्तारियां होना विभाग पर दर्जनों सवाल खड़े करता है, जो अभी तक अनुत्तरित हैं। विवरण के अनुसार 27 मई 2025 को हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज की सीईओ डॉ. नौहेरा शेख को दिल्ली के बाहरी इलाके से जबरन गिरफ्तार किया गया था। जब सीईओ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 25 करोड़ रुपये जमा करने की कोशिश में व्यस्त थीं, तब सुप्रीम कोर्ट की मियाद पूरी होने में अभी एक महीना बाकी था, इसके बावजूद हैदराबाद के नामपल्ली कोर्ट से आदेश लाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एक ओर तो चार साल पहले जिस एफआईआर पर गिरफ्तारी हुई थी, उसके बदले में शिकायतकर्ता निवेशक को पैसे दिए जा चुके थे और साथ ही उक्त एफआईआर पर जमानत भी मिल चुकी थी, लेकिन विभाग को ऐसी क्या जल्दी थी कि उसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 90 दिनों का इंतजार करना भी मुश्किल लग रहा था और डॉ. नौहेरा शेख को बिना किसी देरी के गिरफ्तार कर लिया गया, वहीं दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हीरा ग्रुप की पांच सबसे महंगी जमीनों पर केंद्रीय स्तर पर कार्रवाई जारी रखे हुए था। हैदराबाद सीसीएस द्वारा की जा रही वर्तमान गिरफ्तारी कार्रवाई कई चिंताएं पैदा करती है, पहली यह कि सीसीएस अपनी किसी भी गलती और कमी को छिपाने के लिए बहुत उत्सुक और सक्रिय है, उसे डर है कि डॉ. नौहेरा शेख की बरामदगी से उसके कुछ मामले उजागर हो जाएंगे, या वह किसी खास व्यक्ति जैसे कि भू-माफिया, या भ्रष्ट नेता द्वारा दिए गए टारगेट पर काम करती नजर आएगी। तीसरी बात, विभाग को यह चिंता थी कि हेरा ग्रुप से जुड़े हजारों-लाखों निवेशकों को भुगतान नहीं किया जाएगा। हेरा ग्रुप मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने के बावजूद सीसीएस द्वारा मामले को अपने हाथ में लेना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सीसीएस जानबूझकर जल्दबाजी में थी, जिसके कारण दर्जनों भ्रष्टाचारों और गलत कामों के बावजूद उसे कार्रवाई करनी पड़ी। संक्षेप में, सीसीएस द्वारा हीरा ग्रुप के घेरे को छोटा करना और सीईओ डॉ. नौहेरा शेख की गिरफ्तारी के लिए यह आवश्यक है कि अब सीसीएस और अन्य विभाग उन निवेशकों का पैसा दिलाने में सफल होंगे, जिन्हें पहले भुगतान नहीं किया जा रहा था और खास तौर पर हीरा ग्रुप के उन निवेशकों को पैसा जरूर मिलेगा, जो कोर्ट चले गए हैं और खास तौर पर उन निवेशकों को जो एसएफआईओ चले गए हैं। लेकिन जिस तरह से सीसीएस और विभाग ने कदम उठाए हैं, उससे यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बीच में हीरा ग्रुप के निवेशकों को पैसा दिलाने का कोई हल न निकल जाए, इस डर से गिरफ्तारी की गई। इसलिए अब जबकि सीईओ डॉ. नौहेरा शेख को गिरफ्तार कर लिया गया है, तो सीसीएस को भी इस बात के स्पष्ट प्रमाण देने होंगे कि गिरफ्तारी जानबूझकर की गई थी, न कि किसी भू-माफिया और भ्रष्ट नेता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए।

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