डॉ. नौहेरा शेख की गिरफ्तारी के पीछे
ED हैदराबाद की गैर-कानूनी कार्रवाई का राज खुला
छुट्टियों में हीरा ग्रुप की 50 प्रॉपर्टी की
गैर-कानूनी नीलामी
नई दिल्ली/हैदराबाद (रिपोर्ट: मतिउर रहमान अज़ीज़) देश भर की अदालतों में गर्मी की छुट्टियों के दौरान डॉ.
नौहेरा शेख की गिरफ्तारी और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) हैदराबाद द्वारा हीरा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ की संदिग्ध प्रॉपर्टी की नीलामी की घोषणा ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सपर्ट्स और हीरा ग्रुप के अंदरूनी लोगों का मानना है कि ये कार्रवाई न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है। 8 अप्रैल, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान, केवल 16 खास प्रॉपर्टी की नीलामी की अनुमति दी गई थी, जिसके लिए हीरा ग्रुप की CEO डॉ. नौहेरा शेख ने सहमति दी थी। हालांकि, कोर्ट के इस साफ आदेश के बावजूद ED ने कोई डिटेल्ड डॉक्यूमेंट, साइन किए जाने वाले एग्रीमेंट या खास प्रॉपर्टी की लिस्ट जमा नहीं की। इसके बजाय, कोर्ट बंद होने के तुरंत बाद डॉ. नौहेरा शेख को गिरफ्तार कर लिया गया और MSTC की वेबसाइट पर 50 और प्रॉपर्टी की नीलामी की घोषणा की गई।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई जब सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल के ऑर्डर में सिर्फ़ 16 प्रॉपर्टी का ज़िक्र था और बाकी प्रॉपर्टी पर कोई सुनवाई या ऑर्डर पास नहीं हुआ था। हीरा ग्रुप के सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कानून की मनमानी और पावर के गलत इस्तेमाल का एक उदाहरण है। इस अचानक और गैर-कानूनी कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि हेरा ग्रुप की कई कीमती प्रॉपर्टी पर पहले से ही हैदराबादी लैंड माफियाओं ने जाली कागज़ात के ज़रिए कब्ज़ा कर रखा है। इनमें सैयद अख्तर टोली चौकी, सैयद मोइनुद्दीन, बंदला गणेश और उनके साथियों के नाम शामिल हैं। आरोप है कि ED उन्हीं माफियाओं द्वारा इन प्रॉपर्टी की नीलामी का रास्ता बना रहा है। इन 50 प्रॉपर्टी में ऐसी ज़मीनें भी शामिल हो सकती हैं जिन पर गैर-कानूनी तरीके से कब्ज़ा (एनक्रोचमेंट) किया गया है। इन्हीं कब्ज़ेदारों को कानूनी सुरक्षा देकर उन्हें बेचने का डर है। कुछ प्रॉपर्टीज़ को कुछ खास लोगों को बहुत कम दामों पर देने की साज़िश का भी शक है, जिससे हीरा ग्रुप और उसके इन्वेस्टर्स को बहुत नुकसान होगा।
हीरा ग्रुप ने बार-बार कोर्ट में यह बात कही है कि उनकी प्रॉपर्टीज़ कुछ खास तबके के लोगों को बहुत कम दामों पर ट्रांसफर करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. नौहेरा शेख ने अपनी गिरफ्तारी से पहले और बाद में यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी गैर-कानूनी, गैरकानूनी और गैर-पारदर्शी काम को कामयाब नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा है कि वह हर तरह के अन्याय के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी और भारत के महान कानून की मदद से पूरा न्याय पाएंगी। हीरा ग्रुप के इन्वेस्टर्स से अपील की गई है कि वे सब्र रखें और कानूनी लड़ाई पर भरोसा रखें। ये घटनाएं हीरा ग्रुप के लंबे कानूनी और फाइनेंशियल विवाद का हिस्सा हैं, जहां ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं जबकि ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रॉपर्टीज़ और इन्वेस्टर्स के अधिकारों की सुरक्षा की बात की है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रॉपर्टीज़ की नीलामी की इजाज़त दी थी ताकि पीड़ितों को राहत मिल सके, लेकिन यह प्रोसेस ट्रांसपेरेंट, कानूनी दायरे में और कोर्ट के आदेशों के मुताबिक होना चाहिए था। हैदराबाद के ED ज़ोनल ऑफिस की इस कार्रवाई पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह इन्वेस्टर्स के हित में है या यह खास हितों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है? क्या कोर्ट की छुट्टियों का फायदा उठाकर कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की गई? हीरा ग्रुप के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे सभी डॉक्यूमेंट्स, फैक्ट्स और सबूतों के साथ कोर्ट में अपना केस लड़ेंगे और हर लेवल पर इंसाफ की लड़ाई जारी रखेंगे।

