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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ‘दिशा’ कार्यशाला से न्याय तक पहुंच पर हुआ व्यापक संवाद

चंडीगढ़, 22 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ का जो विजन दिया है, उसमें समावेशी विकास और सुशासन की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। हरियाणा सरकार इस विजन के साथ पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार मानती हैं कि जब तक समाज का हर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और न्याय प्राप्ति के प्रति आश्वस्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय दिशा कार्यशाला में शिरकत कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, न्याय विभाग के सेक्रेटरी श्री नीरज वर्मा, ज्वाइंट सेक्रेटरी श्री सुरेश कुमार भी मौजूद थे। कानून एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की तरफ से दिशा (डिज़ाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस) कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें अलग अलग विश्वविद्यालयों से लॉ संकाय के स्टूडेंट्स और वकील सहित प्रबुद्धजन भी शामिल हुए।  इस अवसर पर दिशा जागरूकता वैन, उतर-पूर्वी क्षेत्र के प्रथागत कानूनों पर ई-पुस्तकों का विमोचन तथा दूरदर्शन की डाक्यूमेंटरी का शुभारंभ भी किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वचन देती है। अनुच्छेद 14, 21 और विशेष रूप से अनुच्छेद 39 के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक को समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त हो। इसी दिशा में, भारत सरकार के न्याय विभाग द्वारा लागू की गई ‘DISHA’ योजना एक महत्वपूर्ण पहल है और इसके लिए 250 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। ताकि ‘सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि DISHA एक नागरिक केंद्रित और तकनीक संचालित पहल है। इसके तहत तीन प्रमुख कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, टेली-लॉः रीचिंग द अनरीच्ड, न्याय बंधु और विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम। ये तीनों कार्यक्रम मिलकर न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बना रहे हैं। टेली-लॉ कार्यक्रम दिशा योजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग कर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी विधिक सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। देशभर में लगभग 2 लाख 50 हजार कॉमन सर्विस सेंटर का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया गया है। यह नेटवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित हैं। यह सुविधा 777 जिलों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अब टेली-लॉ मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर 14454 के माध्यम से भी आसानी से कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा ‘न्याय सहायकों’ की नियुक्ति की गई है। जो घर-घर जाकर लोगों को टेली-लॉ प्लेटफॉर्म से जोड़ने का काम कर रहे है। इसी प्रकार, ‘न्याय बंधु’ कार्यक्रम देश में प्रो-बोनो सेवाओं की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए चलाया गया है और 28 फरवरी तक 10 हजार 263 वकीलों ने अपना पंजीकरण करवाया है। उन्होंने कहा कि कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम के तहत भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए है। जिसके माध्यम से 1 करोड़ 21 लाख 48 हजार लोगों तक पहुंच बनाई जा चुकी है।

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